Total Pageviews

About Me

My photo
मेरा नाम कुल्वेंदर सिंह है| मैं पेशे से बिजनेस असोसिएट हु| मेरी एक छोटी सी मैनेजमेंट कंसल्टंसी फर्म है जिसका नाम मेरे पूजनीय माता व पिता के नाम पे है डगलस एंड लवलीना असोसिएट है| मैं सूफी मत मैं विश्वास करता हु और दुनिया से जुडी हर बात को जानने की जिज्ञासा हमेशा मुझमे रहती है मुझे पढने का काफी शौक है| मैं सभी विषयो की गहराइयों मैं जानने की हमेशा कोशिश करता रहता हु और एक गुरु की तलाश मैं हु जो मुझे असंतुष्ट आत्मा से संतुष्ट आत्मा बनाने मेरी मदद करे मुझे जीवन के रहस्य जानने है|

Nov 28, 2010

एक नया स्वप्न आने वाले कल का.

हम क्या है शायद यह हम जानते ही नही 
या शायद जानकर जानना चाहते ही नही 
हमें किसने बनाया क्यूँ बनाया यह मानते ही नही 
या शायद जानकर हम याद करना चाहते ही नही 
जब उसने यह दुनिया बनाई तो सोचा 
उसके सपनों की नगरी में प्रेम ही प्रेम हो 
तो उसने अपने स्वरूप पर हमें रचा 
और अपनी शक्तियों से हमें नवाजा 
सब कुछ देकर हमें इस धरती पर उतारा
और सोचा यह सब मेरे लखते जिगर संभालेंगे 
हमने उसको ऐसी चोट करी 
उसकी बनायीं दुनिया को शैतानी से भर डाला 
अब भी देर नही हुई कुछ सोचो और अपना उद्धार करो 
माया से निकल कर खोजो खुदको 
और ईश्वर को स्वीकार करो 
उसके सपनों को स्वीकार करो 
सबमे वो रहता है सब अपना मन पाक करो 
फिर सबमे वो दिखेगा तुमको 
जब इश्क होगा जग में तो उसका देखा सपना सच हो जायेगा 
जो उसने देखा अकेले स्वप्न 
हम भी क्यूँ न उसके भागीदार बने
और देखें उसके साथ एक नया स्वप्न 
आने वाले कल का.......आमीन  |

वो कहता है मुझसे की मुझसे प्यार करता है

वो कहता है मुझसे की मुझसे प्यार करता है 
वो मुझमे जीता है मुझमे मरता है 
वो कहता है मुझसे जहाँ देख तु मुझको पायेगा
चाहे राम को पूज ,कृष्ण के भजन कर 
सब में मुझको पायेगा 
ईसा,मूसा,नानक,कबीर में मैं ही हूँ 
अल्लाह,मौला,महावीर, जीसस में मैं ही हूँ
वो कहता है की मुझसे प्यार करता है 
वो मुझमे जीता है मुझमे मरता है 
संगीत में,गीत में ,राग में, ताल में मैं ही हूँ
नृत्य में,छन्द में,रंग में,रूप में,धुप में,छाँव में
कण-कण मैं,मन के मीत में मैं ही हूँ
वो कहता है मुझसे की मुझसे प्यार करता है 
वो मुझमे जीता है मुझमे मरता है 
जीव में,मनुष्य में ,रजो-तमो-सतो गुण में भी 
जड़ में भी चेतन में भी तु मुझको पायेगा 
दोस्त में,दुश्मन में भी तुझे रूप मेरा नजर आएगा 
सब भेद मिट जायेगा फिर क्रोध किस पर आएगा 
वो कहता है मुझसे की मुझसे प्यार करता है 
वो मुझमे जीता है मुझमे मरता है 
तेरा दोस्त मैं,तेरा प्यार मैं,तेरा पिता मैं, तेरा भाई मैं  
हम दोनों जब एक है मैं रूप हूँ तू अक्स है
तो खुद को कैसे अकेला पायेगा जिधर भी नजर गयी वहां 
तुझे हर इंसान मैं भगवान् नजर आएगा सब भेद मिट जायेगा 
वो कहता है मुझसे की मुझसे प्यार करता है 
वो मुझमे जीता है मुझमे मरता है  

Nov 26, 2010

तुम से शुरू तुम से खत्म हो यही मेरी कहानी है

तुम से शुरू तुम से खत्म हो यही मेरी कहानी है
तुम से शुरू हुआ मेरा बचपन तुम में डूबी मेरी जवानी है
तुम में ही फना हो जाये मेरी अंतिम अवस्था यही मेरी जुबानी है
तुमने मुझको गीत लिखाये जाने कितने भाव जगाये 
मेरे गीतों में सिर्फ तेरी ही तेरी निशानी है |
तुम से ही मैंने जीना सीखा तुमसे ही प्रीत निभानी है 
तुममे सब और कुछ भी नहीं ऐसी ही रीत निभानी है 
तुमको खोकर पाया मैंने ,तुमको पा कर कभी खोया है 
मन मेरा उस पल जी भरकर रोया है 
तुम न होना ऐसे जुदा कभी में जीते जी मर जाऊंगा 
तुम से ही प्राण तुम से ही जान ,में दीवानों सा हो जाऊंगा |  

तू आ तो गया

सदियों से कई अभिलाषाएं मेरे अवचेतन मन में रच बस चुकी है 
जिनके कारण में नित्य निरंतर बंजारों सा भटक रहा हूँ 
किंचित ही मेरे स्मृति पटल पर कुछ हल्का सा अहसास हुआ 
में मृगमरीचिका रूपी अभिलाषाओं के पीछे हमेशा से अग्रसर रहा 
इस जीवन में आने का ये मेरा उद्देश्य नही था
सदियों पहले किसी और कारण से पहले मेरा सृजन हुआ 
कुछ कार्य दिया था मुझको वो भूल गया में और मेरा पतन हुआ 
तब से शायद में भटक रहा हूँ ,हर पल शायद इसीलिए अशांत है मन 
जिसने भेजा था मुझको अपने रूप जैसा सृजन कर 
उसकी अवहेलना में करता रहा और अपने मन की में करता रहा 
अब जाकर मुझे ऐसा लगा कुछ खो सा गया है मुझ में 
इस कारण जानने की जिज्ञासा में फिर मिलन हुआ 
जब उससे कहा मुझसे भूल हुई में प्रेम के दीप जला न सका 
तुमने जो कार्य मुझे दिया उसे ठीक से में निभा न सका 
उसने कहा देर हुई  तो देर हुई तू आ तो गया 
हम प्रेम की ज्योत जलाएंगे और सब भटके हुओं को यह कहानी सुनायेंगे 
और एक एक कर उनको जीवन का लक्ष्य बताएँगे 
खुदा की बनायीं दुनियां में खुदा जैसा सोचता है वैसे ही जीवन बिताएंगे | 

प्रेम क्या है कोई तुम से सीखे

प्रेम क्या है कोई तुम से सीखे 
त्याग क्या है कोई तुमसे सीखे 
प्रेम जलने का अर्थ क्या है कोई तुमसे जाने 
प्रेम में डूबने का अर्थ क्या है कोई तुमसे पूछे 
प्रेम में समर्पण कितना है यह कोई तुम में देखे 
प्रेम में प्रेम का रस क्या है वो तुमसे समझे 
कितनी वेदना तुमने सही क्या कोई सह सकता है 
यहाँ तो चंद लम्हों के प्यार में लोग तड़प जाते है 
कोई सदियों से चले आ रहे प्यार के अहसास को जाने 
तुमने जितना इंतजार किया क्या कोई कर सकता है 
तुम्हारे जैसा दर्द कोई क्या अहसास कर सकता है 
आज भी तुम इंतजार में हो फिर भी  यकीं करते हो 
की एक दिन मिलना तय है 
ऐसे आशिक के इश्क की इंतिहा को समझे |
तेरा दर्द तु ही जानता है इस दर्द में डूबा माशूक भी 
एक दिन अपने खुदा जो आशिक है उसका 
उसकी तडपती मोहब्बत को समझे | 

Nov 24, 2010

जब भी में कभी खुश था

जब भी में कभी खुश था शायद मैंने तुम्हें कभी याद न किया 
जब भी में कभी दुखी हुआ उस क्षण तुमने साथ दिया 
जब मैंने तुमको कोसा था आरोप तुम पर लगाये थे 
तब भी तुम चुपचाप खड़े नम आँखों से सिसकाए थे
क्यूँ हो तुम ऐसे जो सब कुछ सह जाते हो 
मुश्किल घडी में सिर्फ तेरे कदम नजर आये थे 
मैं ये न देख सका उस क्षण में तेरे हाथों में था 
और मेरी पाती के जख्म तुमने खाए थे 
में ये देख न सका उस क्षण में की तुम इतना प्रेम करते हो 
मुझ से दूर रहकर भी बिना कहे चुपचाप रहकर भी 
मेरे गम  अपने ऊपर लेते हो 
ऐसा कर तुम दुनिया को क्या दिखलाते हो 
प्रेम मुझसे करते हो और कुछ भी जबां से नहीं बतलाते हो 
चेहरे से तुम्हारे दिखता है तुम झूठा  दिल बहलाते हो 
सोचता हूँ तुमने इतना किया मैं क्या कर पाऊंगा 
बस अब तो यही चाहत है ,तेरे चरणों में अर्पण हो जाऊंगा 
और दास तेरा कहलाऊंगा ,में भी प्रेम का प्रेम हो जाऊंगा 
और दर्द को तेरे सहकर में धन्य धन्य हो जाऊंगा |  

Nov 9, 2010

तेरा हूँ तुझ में रहूँगा तुझ में ही खो जाऊंगा

तेरा हूँ तुझ में रहूँगा तुझ में ही खो जाऊंगा
तेरा होने की चाहत में दीवाना सा हो जाऊंगा

हमको मिलना है मिलेंगे हम मिले बिना न रहेंगे हम
तुझ में खोना है खुद को पाना है इस चाहत में फना हो जाऊंगा

तुम लाख जतन कर लो मुझे तरसाने के
तुम्हे पाना है में पाऊंगा सांसों में बस जाऊंगा

तुम भी न रहोगे मेरे बिना कर लो मेरा तुम इतना यकीं
इतनी चाहत भर जाऊंगा ऐसा वक्त में दिखलाऊंगा

सदियों से तुम भी चाहते यही जो मैंने कहाँ
कल तक तुम ये कहते थे जो मैंने आज तुम से मैंने कहाँ
तुम न मिले कैसे सब सही अगले जन्म फिर आऊंगा

दुनियां में मुझसा अक्स नहीं जिसने अपना रूप न देखा कभी
आईने में एक दिन में अपना रूप दिखलाऊंगा

उस दिन दिल धडकेगा तुम्हारा में धड़कन बन जाऊंगा
में प्रेम का दीप जलाऊंगा तुझ में खो कर में तुझसा ही हो जाऊंगा|

क्यूँ लगा मुझे ऐसा अभी इस पल तुम मेरे पास हो

क्यूँ लगा मुझे ऐसा अभी
इस पल तुम मेरे पास हो
बिन बोले बहुत कुछ कह गए
तुम को सुनने की आस में
हम यूँ ही चुप रह गए
क्यूँ लगा मुझे ऐसा अभी
इस पल तुम मेरे पास हो
तुम आये तो ये आभास हुआ
उस क्षण में जो प्रकाश हुआ
उस आभामंडल में ये प्रयास हुआ
हम कहे कुछ तुम्हे 
तुम सुने बिना ही चले गए
क्यूँ लगा मुझे ऐसा अभी
इस पल तुम मेरे पास हो
सोचता हूँ कुछ कहा नहीं और कह भी गए
सुना नहीं और सुन भी गए
इस जागृत स्वपन में भी प्रेम था 
और हम प्रेम में फिर बह गए 
क्यूँ लगा मुझे ऐसा अभी 
इस पल तुम मेरे पास हो|

Nov 5, 2010

इंसान अक्स भगवान् रूप

तु कौन है, क्या है  किसको खबर, किसको पता
मैं कौन हूँ ,क्या हूँ  किसको खबर, किसको पता
तु चाहता है मिलना मुझसे
मैं चाहता हूँ मिलना तुझसे 
तु खोजता है मुझको,  मैं  खोजता हूँ तुझको 
दोनों ही पहेली बने है अक्सर 
तु प्यार है, तु जान है, तु दोस्त है, मेरा भगवान् है
मैं भी तेरी जान हूँ ,तेरे प्यार का अरमान हूँ मैं एक इंसान हूँ
मैं तुझको पाने निकला और खो गया
तु मुझको पाने निकला और खो गया
जब कहीं रुका जो मैं खुद से ही अनजान था
पाया कि मैने अपनी शक्शियत मैं भगवान् था
जब कहीं रुका जो तु  खुद से ही अनजान था
पाया कि तुने अपनी शक्शियत तु भगवान् था
दोनों ने खुद को खो दिया दोनों ने खुद को पा लिया
जाना जब खुद को मैंने और तुने की तड़पते है मिलने के लिये 
हम एक थे हम एक है हमारी एक ही पहचान है
तु रूप था मैं अक्स था फिर ढूंढता  रहा मैं क्यूँ 
मै अक्स था मै रूप था फिर  ढूंढता  रहा तु  क्यूँ
तुझको भी  मुझसे प्यार था मुझको भी तुझसे प्यार था
तु खो गया था मुझमें मैं खो गया था तुझमें 
सदियों से खोना पाना ये खेल रहा है हममे
ना तु इस खेल से अनजान था ना मैं इस खेल से अनजान था
इस खेल में हम खो गए इस खेल में हम मिल गए
पहले में इंसान था तु भगवान् था
अब तु  इंसान है में भगवान् हूँ 
शायद अब ये ही हमारी पहचान है
इस खेल को खेलेंगे हम सदियों तक 
क्यूँ की तु शायद भूल गया
तु रूप है, तु भगवान् है, में अक्स हूँ इंसान हूँ
दोनों एक है मगर ये हमारी पहचान है|
में आइनें में देखता हूँ पाता हूँ तुझको
तु आईने में देखता है, पाता है मुझको
इसके सिवाय खेल में कुछ आता नहीं है हमको
तु हारता है हमेशा में हारता हूँ हमेशा
जितने की  चाहत में ये खेल यूँ फिर चल जाता है
दोनों ही जानते है हम एक है
इस खेल में परम आनंद आता है हमको 
तु कौन है, क्या है  किसको खबर, किसको पता
मैं कौन हूँ ,क्या हूँ  किसको खबर, किसको पता
मैं चाहता हूँ मिलना तुझसे तु चाहता है मिलना मुझसे




    




नमस्ते ,
मेरे ब्लॉग को पढने के लिए और मेरा हौसला बढाने के लिए धन्यवाद